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बिहार टीचर नियमावली 2023 जारी, अब बिहारी ही बनेंगे बिहार में शिक्षक

देश के सबसे बड़े राज्य में से एक बिहार में नई शिक्षक नियमावली को कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दे दी है। इससे वहां के शिक्षक उम्मीदवार बेहद खुश नजर आ रहे हैं। हालांकि, कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जो नई नियमावली को लेकर अपना विरोध भी जता रहे हैं। खैर, नई नियमावली मंजूरी के साथ पास हो चुकी है और इस पर खुशी जताने वाले ज्यादातर शिक्षक हैं। आइए जानते हैं कि नई नियमावली क्या है।

महिलाओं को मिलेगा आरक्षण

बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर राज्य सरकार ने क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। सरकार ने इसकी नई नियमावली ही जारी कर दी। इसके साथ बिहार राज्य शिक्षक विद्यालय नियमावली 2023 लागू हो चुकी है। इस नियमवाली के अंतर्गत कक्षा एक से लेकर इंटरमीडिएट तक के स्कूली शिक्षकों की नियुक्ती अब बिहार राज्य सरकार की ओर से गठित किए जाने वाले आयोग द्वारा ही की जाएगी।

हालांकि, अभी यह तय नहीं किया गया है कि आयोग कौन सा होगा। ऐसे में आयोग से बहाल होने वाले शिक्षक ही राज्य के कर्मचारी माने जाएंगे। एक से आठ तक की नियुक्ति में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा।

ये बातें जरूर ध्यान रखें

  • शिक्षक उम्मीदवारों को बीएड/एमएड पास करना जरूरी होगा।
  • आयोग की परीक्षा देने के लिए डिग्री के साथ एसटीईटी या सीटीईटी में पास होना भी अनिवार्य होगा।
  • कोई भी शिक्षक अभ्यर्थी इस नई नियमावली के तहत अधिक से अधिक तीन बार ही परीक्षा में बैठ सकेंगे।
  • 2012 से पहले नियुक्त शिक्षक, जो दक्षता परीक्षा में पास होंगे, उनके लिए पात्रता परीक्षा जरूरी नहीं।
  • परीक्षा में मेरिट लिस्ट के अनुसार ही उम्मीदवारों को लाभ मिलेगा।
  • मेरिट के आधार पर ही अभ्यर्थियों को वैकल्पिक पोस्टिंग मिलेगी।
  • जब टीचर राज्य के कर्मचारी बन जाएंगे तो उन्हें भी तबादले और पोस्टिंग की सहूलियत दी जाने लगेगी।
  • वेतन को राज्य सरकार ही निश्चित करेगी।
  • बहाली के लिए ली जाने वाली परीक्षा का पैटर्न आयोग ही तय करेगा। इसमें शिक्षा विभाग अपनी सलाह देगा।

शिक्षकों का हो सकेगा तबादला

  • शिक्षकों के स्थानातंरण की कार्यवाही संबंधित संवर्गीय पद पर नियुक्ति प्राधिकार द्वारा की जाएगी।
  • शिक्षक उम्मीदवारों से केंद्रीयकृत व ऑनलाइन आवेदन की सुविधा है।
  • आवेदन में शिक्षक अभ्यर्थियों को पोस्टिंग का विकल्प मिलेगा। हालांकि, मेरिट के आधार पर ही वरीयता दी जाएगी। अधिक अंक आएंगे तो पोस्टिंग का विकल्प चयन के लिए मिलेगा।
  • तबादला पूरे जिले में होगा और विशेष परिस्थितियों में अंतर जिला तबादले भी होंगे।
  • 38 जिला शिक्षक नियुक्ति प्राधिकार होंगे और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) इसका नेतृत्व करेंगे।
  • जिला शिक्षा अधिकारी ही आयोग से अनुशंसित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटेंगे।

पात्रता

  • आवेदन करने वाला भारत का नागरिक हो और बिहार राज्य का स्थायी निवासी भी हो।
  • स्कूल टीचर के पद पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्धारा निर्धारित शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक योग्यता रखता हो।

सातवें चरण का यह है अर्थ

नई नियमावली में सातवें चरण का अर्थ है कि सरकार ने इस चरण में करीब 2.5 लाख शिक्षकों के खाली पदों को भरने की मंजूरी दे रखी है। सातवें चरण का मतलब अर्थ नियोजन से भी जुड़ा था। वहीं, इससे नियोजित शिक्षकों पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा। जिला परिषद या नगर निकाय इकाइयों से नए शिक्षक नियोजित नहीं होंगे। जो नियोजित हैं, उन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। वो पहले की तरह ही काम करते रहेंगे। उन्हें बस इस नियमावली का एक ही लाभ मिलेगा कि वो चाहें तो इस संवर्ग में सम्मिलित होने के लिए अर्हता रहने पर परीक्षा दे सकते हैं।

 

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